अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत ने सीधी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? जानिए मोदी सरकार का आधिकारिक रुख, वैश्विक प्रतिक्रियाएं और पूरे मामले की साफ व सरल जानकारी।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत की चिंता

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया अमेरिकी-इजरायली हमलों में मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इस घटनाक्रम के बीच भारत सरकार ने सीधे तौर पर किसी की निंदा या शोक संदेश जारी नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। जानकारी के मुताबिक सरकार ने तनाव बढ़ाने वाली भाषा से बचते हुए संयमित रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर देश के भीतर राजनीतिक बहस भी तेज हुई है, लेकिन सरकार ने क्षेत्रीय हालात को देखते हुए संतुलित प्रतिक्रिया दी है।
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संवाद और कूटनीति पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि ऐसे विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। उन्होंने दोहराया कि भारत की नीति हमेशा शांतिपूर्ण समाधान की रही है। सरकार का कहना है कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में बातचीत का रास्ता अपनाना जरूरी है।
सूत्रों के अनुसार भारत ने किसी पक्ष का समर्थन या विरोध करने के बजाय क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है। यह रुख पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर देखा गया है, जहां भारत ने सीधे बयान देने के बजाय संतुलित कूटनीतिक भाषा का उपयोग किया।
ओआईसी देशों का सीमित समर्थन
57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में से बहुत कम देशों ने शोक व्यक्त किया। जानकारी के मुताबिक रूस, चीन, उत्तर कोरिया, इराक, तुर्की, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे कुछ देशों ने प्रतिक्रिया दी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे निंदनीय बताया, जबकि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने घटना को स्वीकार्य नहीं कहा।
इराक में तीन दिन का शोक घोषित किया गया। हालांकि अधिकांश मुस्लिम बहुल देशों ने औपचारिक रूप से संवेदना व्यक्त नहीं की। यह भी देखा गया कि कुछ शहरों में लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
भारत का संयमित रुख
भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर संयम और संवाद की अपील की। साथ ही ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के सहयोगियों पर किए गए हमलों की आलोचना भी की गई। जानकारी के मुताबिक मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति की बैठक में हालात की समीक्षा की गई।
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सरकार का कहना है कि भारत का रुख राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखकर तय किया गया है। विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन सरकार ने इसे साम्प्रदायिक रूप देने की बात से दूरी बनाए रखी है।
खामेनेई और भारत से जुड़े विवाद

सरकारी सूत्रों के अनुसार 2017 से 2024 के बीच अयातुल्ला खामेनेई ने चार बार भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी की थी। 2017 में उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर बयान दिया था। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद उन्होंने नीति पर सवाल उठाया। 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की
जिसे भारत ने आपत्तिजनक बताया। ईरान की संसद ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर भी आलोचना की थी। सितंबर 2024 में खामेनेई ने एक और पोस्ट में भारत का उल्लेख किया, जिसे विदेश मंत्रालय ने भ्रामक बताया। जानकारी के मुताबिक हर बार भारतीय पक्ष ने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी।
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