सोमवार, 9 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में oil price today अचानक तेज़ी से बढ़ गया। ईरान से जुड़े युद्ध के बढ़ने के कारण तेल उत्पादन और उसकी सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है।
इसी वजह से तेल की कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। यह बढ़ोतरी 2022 के बाद पहली बार देखी गई है। बाजार खुलने के बाद कीमतों में तेज़ उछाल आया और निवेशकों के बीच चिंता भी बढ़ी।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है, जिसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।
Brent crude oil price में 23% की तेज़ बढ़ोतरी
अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले brent crude oil price में भी सोमवार को बड़ी तेजी देखी गई। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में कारोबार शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।

इससे पहले शुक्रवार, 6 मार्च को इसका क्लोजिंग प्राइस 92.69 डॉलर था। यानी कुछ ही दिनों में कीमत में करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव मुख्य कारण माना जा रहा है।
युद्ध के कारण तेल के उत्पादन और परिवहन दोनों पर असर पड़ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
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Crude oil price today में उछाल, अमेरिकी तेल भी महंगा
आज के बाजार में crude oil price today में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिका में उत्पादित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
शुक्रवार को इसका भाव 90.90 डॉलर था, यानी इसमें करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे पहले अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 30 जून 2022 को 105.76 डॉलर तक पहुंची थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की वजह से वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ रहा है, जिसके कारण crude oil price लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट से बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर तेल के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों पर भी दिखाई दे रहा है। हर दिन करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जो दुनिया के कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत है।

लेकिन ईरान के संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण कई तेल टैंकर इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं। इस मार्ग से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का तेल दुनिया तक पहुंचता है। इस स्थिति ने brent crude oil की सप्लाई को लेकर बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
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उत्पादन घटा, वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने भी तेल उत्पादन कम कर दिया है क्योंकि निर्यात कम होने से उनके स्टोरेज टैंक भर रहे हैं। वहीं युद्ध के दौरान ईरान, इज़राइल और अमेरिका की ओर से तेल और गैस से जुड़ी कई जगहों पर हमले भी हुए हैं।
इससे सप्लाई को लेकर और अनिश्चितता बढ़ गई है। अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहती है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमत भी बढ़कर 3.45 डॉलर प्रति गैलन हो गई है,
जो एक हफ्ते पहले से लगभग 47 सेंट ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता oil price दुनिया भर में महंगाई बढ़ा सकता है।
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