मध्य पूर्व संकट के बीच अमेरिका ने ईरानी तेल पर छूट दी, जिससे भारत को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन ईरान के ताजा बयान ने स्थिति को जटिल बना दिया है, जानें पूरी खबर।
भारत फिर से ईरान से तेल खरीदने की तैयारी में

भारत में तेल कंपनियां फिर से ईरान से कच्चा तेल खरीदने की योजना बना रही हैं। इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने हाल ही में ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और युद्ध के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
भारत पहले से ही समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद रहा है। अब ईरानी तेल को भी एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि स्थिति पूरी तरह आसान नहीं है, क्योंकि ईरान ने खुद कहा है कि उसके पास अभी अतिरिक्त तेल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में भारत की योजना पर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।
Also Read: Samsung Galaxy S25 Ultra हुआ सस्ता! ₹20,000 तक की छूट
अमेरिका के फैसले से तेल बाजार में हलचल
अमेरिका के वित्त मंत्री ने शुक्रवार को यह अनुमति दी कि समुद्र में फंसा हुआ ईरानी तेल बेचा जा सकता है। इससे पहले अमेरिका लंबे समय से ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाए हुए था। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को कम करना है, जो पूरे हफ्ते 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थीं।
तेल की कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को लगभग रोक दिया है। यह रास्ता बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस यहीं से होकर गुजरता है।
भारत की तेल जरूरत और नए विकल्प
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल विदेशों से आयात करता है। इसमें से करीब 60% तेल खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई संकट आता है, तो उसका सीधा असर भारत पर पड़ता है।

अभी भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी है, खासकर उन जहाजों से जो पहले चीन जाने वाले थे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सिर्फ एक हफ्ते में 30 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद लिया है। अब अगर ईरान से भी तेल मिलना शुरू होता है, तो भारत को अपने तेल स्रोतों में और विकल्प मिल सकते हैं, जिससे आपूर्ति बेहतर हो सकती है।
ईरानी तेल भारत के लिए क्यों अहम है
ईरान पहले भी भारत का एक बड़ा तेल सप्लायर रहा है। साल 2018 से पहले भारत के कुल तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5% थी। बाद में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरान से तेल खरीदना बंद करना पड़ा।
अब अगर फिर से ईरानी तेल मिलना शुरू होता है, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए इसे इस्तेमाल करना आसान होगा, क्योंकि वे पहले भी इसे प्रोसेस कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरियां बिना ज्यादा बदलाव के ईरानी तेल को फिर से इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे लागत और समय दोनों बच सकते हैं।
Also Read: RBSE 10वीं रिजल्ट 2026
ईरान की सख्ती से बढ़ी अनिश्चितता
हालांकि अमेरिका ने प्रतिबंधों में ढील दी है, लेकिन ईरान का रुख कुछ अलग नजर आ रहा है। ईरान के तेल मंत्रालय ने साफ कहा है कि उसके पास फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए अतिरिक्त तेल उपलब्ध नहीं है। इससे स्थिति और जटिल हो गई है।
माना जा रहा है कि ईरान इस समय युद्ध के दौरान आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना शामिल है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में बाजार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि इससे तेल की कीमतों और भारत की योजना पर सीधा असर पड़ सकता है।
-End

Digital Marketer and Content Writer specializing in transforming trending and latest news into clear, research-driven, high-quality content.
