Nasa Satellite crash on Earth - Inbriefy
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NASA का 1300-पाउंड सैटेलाइट आज धरती पर गिरेगा, जानिए कितना है खतरा

NASA का 1300-पाउंड का Van Allen Probe A सैटेलाइट करीब 14 साल बाद पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाला है। जानिए NASA satellite reentry कब होगी, इसके पीछे की वजह क्या है और लोगों के लिए खतरा कितना है।

1,300 पाउंड का NASA सैटेलाइट आज धरती पर गिरने वाला

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Nasa Satellite crash on Earth – Inbriefy

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का लगभग 1,300 पाउंड वज़न वाला सैटेलाइट अब धरती पर वापस गिरने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सैटेलाइट 10 मार्च को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। इस सैटेलाइट का नाम Van Allen Probe A है, 

जिसे अगस्त 2012 में लॉन्च किया गया था। यह लगभग 14 साल से पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा था। NASA ने इसे एक दूसरे सैटेलाइट Van Allen Probe B के साथ भेजा था ताकि पृथ्वी के आसपास मौजूद रेडिएशन बेल्ट का अध्ययन किया जा सके। 

अब इसका मिशन खत्म हो चुका है और इसकी कक्षा धीरे-धीरे नीचे आ गई है, जिसके कारण यह अब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हुए धरती की ओर गिरने वाला है।

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NASA Satellite Reentry का समय और अनुमान

अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार यह NASA satellite reentry लगभग 10 मार्च को शाम 7:45 बजे EDT (2345 GMT) के आसपास हो सकती है। हालांकि यह समय पूरी तरह निश्चित नहीं है, क्योंकि सैटेलाइट की गति और वायुमंडल की स्थिति के आधार पर इसमें लगभग 24 घंटे का अंतर हो सकता है। 

वैज्ञानिक लगातार इसके रास्ते पर नजर रख रहे हैं और जैसे-जैसे नई जानकारी मिलती है, अनुमान भी अपडेट किया जा रहा है। अंतरिक्ष से लौटते समय सैटेलाइट बहुत तेज गति से वायुमंडल में प्रवेश करता है, 

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जिससे उसका अधिकांश हिस्सा जलकर खत्म हो जाता है। इसलिए वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके अधिकतर हिस्से पृथ्वी तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाएंगे।

क्या लोगों के लिए कोई खतरा है?

NASA के अनुसार NASA satellite crash से लोगों को नुकसान होने की संभावना बहुत कम है। एजेंसी ने बताया है कि किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने की संभावना लगभग 1 in 4,200 यानी लगभग 0.02% है। 

इसका एक बड़ा कारण यह है कि पृथ्वी की लगभग 70% सतह पानी से ढकी हुई है। ऐसे में यदि सैटेलाइट के कुछ टुकड़े वायुमंडल से बचकर नीचे तक पहुंचते भी हैं, तो उनके खुले समुद्र में गिरने की संभावना ज्यादा है। 

इसलिए वैज्ञानिकों का कहना है कि शहरों या आबादी वाले इलाकों में गिरने का खतरा बहुत कम है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

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Van Allen Probe मिशन का उद्देश्य

Van Allen Probe A और Van Allen Probe B को पृथ्वी के आसपास मौजूद रेडिएशन बेल्ट का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था। इन सैटेलाइट्स को पहले Radiation Belt Storm Probes नाम दिया गया था। ये सैटेलाइट एक खास प्रकार की अंडाकार कक्षा में घूमते थे, 

जिससे वे कभी पृथ्वी से 18,900 मील (30,415 किमी) दूर चले जाते थे और कभी 384 मील (618 किमी) तक करीब आ जाते थे। इस मिशन की शुरुआती योजना सिर्फ दो साल की थी, लेकिन दोनों सैटेलाइट उम्मीद से ज्यादा समय तक काम करते रहे। 

Van Allen Probe B जुलाई 2019 तक और Van Allen Probe A अक्टूबर 2019 तक सक्रिय रहा। इनसे मिले डेटा का उपयोग वैज्ञानिक आज भी कर रहे हैं।

सौर गतिविधि के कारण जल्दी गिर रहा सैटेलाइट

NASA के अनुसार इन दोनों सैटेलाइट्स को मूल रूप से 2034 तक पृथ्वी की कक्षा में बने रहने की उम्मीद थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सूर्य की गतिविधि (solar activity) सामान्य से ज्यादा रही है। 

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इससे पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल थोड़ा फैल गया और अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट्स पर घर्षण (drag) बढ़ गया। इसी वजह से उनकी कक्षा धीरे-धीरे नीचे आने लगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि  यही कारण है कि Van Allen Probe A अब जल्दी पृथ्वी पर लौट रहा है। 

वहीं इसका जुड़वां सैटेलाइट Van Allen Probe B अभी भी कक्षा में मौजूद है और उसके 2030 से पहले पृथ्वी पर गिरने की संभावना नहीं है।

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