आज रात बस जितना बड़ा एस्टेरॉयड 2026 EG1 पृथ्वी के बेहद पास से गुजरने वाला है। जानिए यह कितनी दूरी से गुजरेगा, इसकी रफ्तार क्या है और नासा ने इसे लेकर क्या जानकारी दी है।
पृथ्वी के पास से गुजरेगा बस जितना बड़ा एस्टेरॉयड

अंतरिक्ष में हाल ही में खोजा गया एक बस के आकार का एस्टेरॉयड आज रात पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है। इस एस्टेरॉयड का नाम 2026 EG1 रखा गया है। वैज्ञानिकों ने इसे 8 मार्च को खोजा था,
यानी इसकी खोज हुए अभी एक हफ्ता भी पूरा नहीं हुआ है। यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के काफी पास से गुजरेगा, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पृथ्वी या चंद्रमा को किसी भी तरह का खतरा नहीं है।
यह अंतरिक्ष पिंड चुपचाप अपनी गति से पृथ्वी के पास से निकल जाएगा। खास बात यह है कि यह चंद्रमा की दूरी से भी कम दूरी पर पृथ्वी के पास आएगा, लेकिन इसके बावजूद यह पूरी तरह सुरक्षित माना जा रहा है।
किस समय और कितनी दूरी से गुजरेगा एस्टेरॉयड
नासा के अनुसार यह एस्टेरॉयड 12 मार्च की रात 11:27 बजे EDT (भारतीय समय के अनुसार 13 मार्च की सुबह करीब 3:27 GMT) पर पृथ्वी के सबसे करीब पहुंचेगा।
उस समय यह पृथ्वी से लगभग 1,97,466 मील (लगभग 3,17,791 किलोमीटर) की दूरी पर होगा। यह दूरी दक्षिणी गोलार्ध के ऊपर से गुजरते हुए तय होगी, यानी यह अंटार्कटिका के नीचे से अपने रास्ते पर आगे बढ़ेगा।

हालांकि यह दूरी अंतरिक्ष के हिसाब से काफी कम मानी जाती है, फिर भी यह पृथ्वी से सुरक्षित दूरी पर रहेगा और किसी तरह का खतरा पैदा नहीं करेगा।
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एस्टेरॉयड की रफ्तार और आकार
वैज्ञानिकों के मुताबिक 2026 EG1 का आकार लगभग 32 से 72 फीट (करीब 10 से 22 मीटर) के बीच है। यह लगभग एक बस के आकार के बराबर माना जा रहा है। जब यह पृथ्वी के पास से गुजरेगा तब इसकी गति बेहद तेज होगी।
अनुमान के अनुसार यह करीब 21,513 मील प्रति घंटा (लगभग 34,621 किलोमीटर प्रति घंटा) की रफ्तार से आगे बढ़ेगा। इतनी तेज गति के कारण यह बहुत जल्दी पृथ्वी के पास से निकल जाएगा। पृथ्वी के पास आने से पहले यह चंद्रमा के पास से भी दूर से गुजर चुका होगा और फिर अपने रास्ते पर आगे बढ़ जाएगा।
सूर्य के चारों ओर इसका लंबा चक्कर
शुरुआती अध्ययन से पता चला है कि यह एस्टेरॉयड सूर्य के चारों ओर 655 दिनों में एक चक्कर पूरा करता है। इसका रास्ता अंडाकार यानी एलिप्टिकल है। इस यात्रा के दौरान यह कभी पृथ्वी की कक्षा के अंदर तक पहुंच जाता है,
जबकि कभी यह मंगल ग्रह की कक्षा से भी आगे निकल जाता है। इसका मतलब है कि यह एस्टेरॉयड हमारे सौरमंडल में लंबी दूरी तय करता है और अलग-अलग ग्रहों के रास्तों के बीच से गुजरता रहता है।
अगली बार किसी ग्रह के पास कब आएगा
वैज्ञानिकों के अनुसार यह एस्टेरॉयड अब किसी ग्रह के इतने पास बहुत लंबे समय बाद आएगा। अगली बार इसका नजदीकी ग्रह संपर्क 13 सितंबर 2186 को होगा, जब यह मंगल ग्रह से लगभग 75 लाख मील (करीब 1.21 करोड़ किलोमीटर) की दूरी से गुजरेगा। यानी आने वाले कई दशकों तक यह किसी ग्रह के ज्यादा करीब नहीं पहुंचेगा।
नासा कितने एस्टेरॉयड पर नजर रख रहा है
नासा और उसके सहयोगी संस्थान इस समय 41,000 से ज्यादा नजदीकी एस्टेरॉयड पर नजर रख रहे हैं। आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है। इसकी एक वजह वेरा रुबिन ऑब्जर्वेटरी भी है,
जिसने अपने शुरुआती डेटा में ही सौरमंडल के करीब 2,000 नए अंतरिक्ष पिंड खोज लिए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि नई तकनीकों की मदद से भविष्य में और भी कई एस्टेरॉयड की पहचान हो सकती है।
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पृथ्वी के लिए खतरे की स्थिति क्या है

इतनी बड़ी संख्या में एस्टेरॉयड होने के बावजूद वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है। नासा के Center for Near Earth Object Studies के अनुसार अगले 100 सालों में कोई बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी से टकराकर भारी नुकसान नहीं करेगा।
फिर भी वैज्ञानिक एहतियात के तौर पर लगातार रिसर्च कर रहे हैं। इसके लिए वे अभ्यास और परीक्षण भी करते हैं ताकि अगर भविष्य में कभी खतरा पैदा हो तो पृथ्वी की सुरक्षा के लिए पहले से तैयारी की जा सके।
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