12वीं पास Shubham Gupta ने दिवालियापन से उबरकर Bonkers Corner को ₹300 करोड़ की वैल्यूएशन तक पहुंचाया। Shark Tank India की पूरी कहानी पढ़ें।
Bonkers Corner के फाउंडर Shubham Gupta की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है।
एक समय ऐसा भी था जब उनके परिवार को दिवालियापन का सामना करना पड़ा। हालात इतने खराब थे कि आगे का रास्ता साफ़ दिखाई नहीं देता था। लेकिन शुबहम ने हार नहीं मानी।
मेहनत और सही सोच के दम पर उन्होंने एक स्ट्रीटवियर ब्रांड खड़ा किया, जो आज करीब ₹100 करोड़ का बिज़नेस बन चुका है।जब वे Shark Tank India में पहुंचे, तो उन्होंने ₹1.5 करोड़ के बदले 0.5% इक्विटी की डील रखी।

उनकी सच्चाई, संघर्ष और आगे बढ़ने की सोच ने सभी शार्क्स को प्रभावित किया।
आख़िरकार Namita Thapar ने उनके विज़न पर भरोसा जताया और डील फाइनल कर दी।
Shark Tank India Season 5 में दिखी असली प्रेरणा
Shark Tank India के Season 5 के एक एपिसोड में दर्शकों को असली प्रेरणा देखने को मिली Gen-Z के पसंदीदा स्ट्रीटवियर ब्रांड Bonkers Corner के फाउंडर Shubham Gupta पूरे आत्मविश्वास के साथ टैंक में पहुंचे।
उनके चेहरे पर घबराहट नहीं थी, बल्कि सालों के संघर्ष से आई एक गहरी मजबूती झलक रही थी।
वे अपने साथ 10 साल की मेहनत, गलतियों, सीख और कभी हार न मानने वाली सोच की कहानी लेकर आए थे
Also Read: Gold Price Today: सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट, अभी जानें लेटेस्ट रेट
कैसे शुबहम गुप्ता ने Bonkers Corner को दोबारा खड़ा किया
Shubham Gupta का सफर साल 2011 से शुरू हुआ, जब उनके परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा उनके पिता का वर्षों पुराना टेक्सटाइल बिज़नेस पूरी तरह फेल हो गया और परिवार को दिवालियापन झेलना पड़ा।
शुबहम उस समय बस 12वीं पास ही थे। पढ़ाई में उनका ज़्यादा मन नहीं लगता था, लेकिन हालात ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे ज़िंदगी की शुरुआत फिर से करें। उन्होंने मुंबई की गलियों को ही अपना क्लासरूम बना लिया छोटे-छोटे पार्ट-टाइम काम किए और धीरे-धीरे ई-कॉमर्स की दुनिया में कदम रखा।
साल 2025 तक Bonkers Corner एक छोटे से ऑनलाइन स्टोर से निकलकर एक बड़ा स्ट्रीटवियर ब्रांड बन चुका था पिछले वित्तीय साल में कंपनी ने करीब ₹100 करोड़ का बिज़नेस किया अनुमान था कि 2025 के अंत तक यह आंकड़ा ₹125–140 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
जब Shubham Gupta Shark Tank India में आए, तो उन्होंने पूरे भरोसे के साथ बताया कि
2026 में कंपनी ₹180 करोड़ का रेवेन्यू करेगी। उन्होंने ₹1.5 करोड़ के बदले 0.5% इक्विटी मांगी, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन करीब ₹300 करोड़ बैठती थी।
शुरुआत में शार्क्स इस वैल्यूएशन को सुनकर चौंक गए लेकिन जल्दी ही उन्हें समझ आ गया कि शुबहम पहले से ही एक सफल बिज़नेसमैन हैं। असल में उन्हें पैसों से ज़्यादा ज़रूरत थी IT सिस्टम और लॉजिस्टिक्स में सही गाइडेंस और मेंटरशिप की।
Bonkers Corner की यह कहानी सिर्फ़ एक ब्रांड की सफलता नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के लिए एक संदेश है जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालातों से गुजर रहे हैं।
Shubham Gupta ने साबित कर दिया कि डिग्री से ज़्यादा ज़रूरी होती है सीखने की भूख, धैर्य और सही फैसले लेने की हिम्मत।
Shark Tank India का यह सफर यही सिखाता है कि अगर सोच साफ़ हो और मेहनत लगातार हो, तो एक साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता में बदल सकती है।
Shark Tank Deal: किसने लगाया दांव?
The Minimalist के फाउंडर Mohit Yadav ने डील पलटने की कोशिश की। उन्होंने ₹2 करोड़ के बदले 1% इक्विटी का ऑफर दिया, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन ₹200 करोड़ बैठती थी।
लेकिन Namita Thapar का ऑफर ज़्यादा मजबूत और साफ़ था।
वही ऑफर शुबहम को सबसे ज़्यादा सही लगा।
जब कोई और बेहतर ऑफर नहीं आया, तो Shubham Gupta ने नमिता का ऑफर स्वीकार कर लिया।

Digital Marketer and Content Writer specializing in transforming trending and latest news into clear, research-driven, high-quality content.

