Ustaad Bhagat Singh Review - Inbriefy
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Ustaad Bhagat Singh Review: पवन कल्याण की फिल्म में दमदार एंट्री, लेकिन कहानी में रह गई बड़ी कमी!

Ustaad Bhagat Singh Review: जानिए पवन कल्याण की इस नई फिल्म की पूरी कहानी, एक्टिंग, म्यूजिक और क्या यह Gabbar Singh जैसा जादू दोबारा चला पाई या नहीं।

फिल्म की रिलीज़ और उम्मीदें

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पवन कल्याण और निर्देशक हरीश शंकर की जोड़ी ने 2012 में “गब्बर सिंह” जैसी बड़ी हिट फिल्म दी थी। इसी वजह से जब दोनों ने दोबारा साथ काम करने की घोषणा की, तो दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। यह फिल्म 2020 में घोषित हुई थी, 

लेकिन कोरोना महामारी और पवन कल्याण की राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण इसकी शूटिंग में देरी होती रही। कई सालों के इंतजार के बाद अब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। दर्शकों के मन में सवाल था कि क्या यह फिल्म भी “गब्बर सिंह” जैसी सफल और यादगार बन पाएगी या नहीं।

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Ustaad Bhagat Singh कहानी क्या है

फिल्म की कहानी एक शिक्षक और उसके छात्र के रिश्ते पर आधारित है। एक नेक शिक्षक (के. एस. रविकुमार) आदिवासी इलाके में बच्चों के लिए काम करता है और वहां एक समझदार और बहादुर लड़के (पवन कल्याण) से मिलता है। वह उसे “उस्ताद भगत सिंह” नाम देता है और पढ़ाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनाता है। 

आगे चलकर भगत एक पुलिस अधिकारी बन जाता है और बुरे लोगों के खिलाफ लड़ता है। इस दौरान उसका शिक्षक राज्य का मुख्यमंत्री बन जाता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब मुख्यमंत्री की हत्या की साजिश रची जाती है। इसके बाद भगत कई चुनौतियों का सामना करता है और भ्रष्ट नेता नागप्पा और उसके बेटों से टकराता है।

कलाकारों का प्रदर्शन

फिल्म में पवन कल्याण का लुक और स्टाइल काफी अच्छा दिखाया गया है। उन्होंने एक्शन, इमोशन और कॉमेडी तीनों में अच्छा काम किया है। खलनायक की भूमिका में आर. पार्थिबन ने दमदार अभिनय किया है और उनका किरदार प्रभावशाली लगता है। के. एस. रविकुमार ने शिक्षक और बाद में मुख्यमंत्री के रोल में संतुलित और गंभीर अभिनय किया है। 

श्रीलीला ने एक रेडियो जॉकी के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया है और उनकी जोड़ी पवन कल्याण के साथ ठीक लगती है। वहीं राशि खन्ना का रोल छोटा है, इसलिए उन्हें ज्यादा करने का मौका नहीं मिला। बाकी सहायक कलाकारों ने भी ठीक-ठाक काम किया, लेकिन कुछ कॉमेडी सीन खास असर नहीं छोड़ते।

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तकनीकी पक्ष और संगीत

फिल्म के तकनीकी पक्ष की बात करें तो सिनेमैटोग्राफी अच्छी है और जंगल के दृश्य व सेट्स को खूबसूरती से दिखाया गया है। प्रोडक्शन वैल्यू भी मजबूत है, जिससे फिल्म देखने में भव्य लगती है। हालांकि संगीत इस फिल्म का कमजोर हिस्सा है। 

देवी श्री प्रसाद का म्यूजिक इस बार औसत है और गाने ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ते। बैकग्राउंड म्यूजिक भी साधारण है और कई जगह फिल्म को बेहतर बनाने में मदद नहीं कर पाता। एडिटिंग खासकर पहले हिस्से में थोड़ी कमजोर लगती है, जिससे फिल्म की गति धीमी महसूस होती है।

फिल्म की खास बातें और कमियां

Film Song Lyrics - Inbriefy
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फिल्म की सबसे बड़ी ताकत पवन कल्याण की स्क्रीन प्रेजेंस है, जो दर्शकों को बांधे रखती है। दूसरे हाफ में कुछ सीन जैसे पुलिस स्टेशन और एक्शन वाले हिस्से अच्छे लगे हैं। कुछ डायलॉग भी प्रभावशाली हैं। 

लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसका पुराना और पहले जैसा देखा हुआ स्क्रीनप्ले है। शुरुआत के लगभग 30 मिनट धीमे और कम दिलचस्प लगते हैं। कई सीन और कॉमेडी हिस्से पुराने अंदाज के लगते हैं और कहानी में नया पन कम महसूस होता है।

कुल मिलाकर फिल्म कैसी है

कुल मिलाकर “उस्ताद भगत सिंह” एक ऐसी फिल्म है जिसमें कुछ अच्छे पल हैं, खासकर दूसरे हिस्से में। पवन कल्याण के फैंस के लिए इसमें देखने लायक काफी कुछ है। लेकिन अगर पूरी फिल्म की बात करें तो यह “गब्बर सिंह” जैसी प्रभावशाली नहीं बन पाती। जिन दर्शकों को स्टार पर आधारित मसाला फिल्में पसंद हैं, वे इसे देख सकते हैं। वहीं जो लोग कुछ नया और अलग कंटेंट चाहते हैं, उन्हें यह फिल्म औसत लग सकती है।

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