ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल रिकी पोंटिंग ने टी20 वर्ल्ड कप में टीम के प्रदर्शन को “काफी खराब” बताया है। उनका कहना है कि इस बार ऑस्ट्रेलियाई टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। टीम ने तीन मैच खेले, लेकिन सिर्फ एक में जीत दर्ज कर पाई। इसी वजह से वह सुपर एट चरण में पहुंचने की दौड़ से बाहर हो गई है।
ओमान के खिलाफ होने वाला अगला मैच भी अब टीम की स्थिति नहीं बदल सकता। पोंटिंग ने साफ कहा कि इस पूरे अभियान में टीम कई अहम मौकों पर कमजोर साबित हुई और यही कारण रहा कि वह टूर्नामेंट में आगे नहीं बढ़ सकी।

शुरुआत में लगी चोटों से टीम को दिक्कत हुई
पोंटिंग ने बताया कि टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले ही टीम को चोटों की समस्या का सामना करना पड़ा। जोश हेज़लवुड और पैट कमिंस जैसे प्रमुख गेंदबाज बाहर हो गए थे। इसके अलावा टिम डेविड भी शुरुआती समय में उपलब्ध नहीं थे। इन अनुपस्थितियों का असर टीम के संतुलन पर पड़ा।
पोंटिंग का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में जब मुख्य खिलाड़ी बाहर हो जाते हैं, तो टीम पर अतिरिक्त दबाव आ जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ चोटों को ही हार की वजह नहीं माना जा सकता, क्योंकि मैदान पर प्रदर्शन ही अंतिम नतीजा तय करता है।
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जिम्बाब्वे से हार टीम के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई
पोंटिंग के अनुसार जिम्बाब्वे के खिलाफ मिली हार इस टूर्नामेंट का निर्णायक मोड़ साबित हुई। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को इस मैच को जीतना ही चाहिए था, लेकिन टीम ऐसा नहीं कर सकी। पोंटिंग का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में कमजोर मानी जाने वाली टीमों के खिलाफ हार की गुंजाइश नहीं होती।

श्रीलंका के खिलाफ मैच को उन्होंने चुनौतीपूर्ण माना और कहा कि घरेलू परिस्थितियों में श्रीलंका को हराना आसान नहीं था। श्रीलंका ने मजबूत रन चेज किया। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ हार को पोंटिंग ने वह मौका बताया, जिसे गंवाना टीम के लिए महंगा साबित हुआ।
टीम में पहले जैसा दम और आत्मविश्वास नजर नहीं आया
पोंटिंग ने कहा कि कागज पर मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई टीम में पहले जैसी आक्रामकता और आत्मविश्वास नहीं दिखता। उनका मानना है कि बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए अनुभवी और प्रमुख खिलाड़ियों को महत्वपूर्ण मौकों पर आगे आना पड़ता है। इस बार टीम को शीर्ष क्रम से पर्याप्त रन नहीं मिले।
कैमरन ग्रीन नंबर तीन पर और टिम डेविड नंबर चार पर प्रभाव नहीं छोड़ सके। जिम्बाब्वे के खिलाफ शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए। श्रीलंका के खिलाफ अच्छी शुरुआत के बाद आखिरी ओवरों में तेजी से विकेट गिरे, जिससे टीम का मोमेंटम खत्म हो गया। पोंटिंग ने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे मौके ही मैच का रुख बदल देते हैं।
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T20 वर्ल्ड कप को लेकर टीम की गंभीरता पर सवाल उठे
कुछ लोगों का मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम टी20 वर्ल्ड कप को उतनी प्राथमिकता नहीं देती, लेकिन पोंटिंग इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एशेज सीरीज के बाद खिलाड़ियों के लिए तुरंत खुद को तैयार करना आसान नहीं होता, क्योंकि लंबे टेस्ट मैच शारीरिक और मानसिक रूप से थका देते हैं। कुछ खिलाड़ी बिग बैश लीग में खेले,
जबकि कुछ ने आराम किया ताकि वे वर्ल्ड कप के लिए तैयार रह सकें। पोंटिंग ने जोर देकर कहा कि हर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी का सपना आईसीसी ट्रॉफी जीतना होता है और टीम की हार का कारण प्राथमिकता की कमी नहीं, बल्कि मैदान पर प्रदर्शन रहा।
2028 और ओलंपिक को लेकर भविष्य की झलक
पोंटिंग ने आने वाले वर्षों की टीम को लेकर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि मिचेल मार्श, ट्रेविस हेड और जोश इंग्लिस जैसे खिलाड़ी 2028 तक टीम का हिस्सा रह सकते हैं। स्टीव स्मिथ ने भी ओलंपिक टीम में खेलने की इच्छा जताई है, हालांकि यह देखना होगा कि आगे क्या होता है।
कैमरन ग्रीन का भविष्य उनके फॉर्म पर निर्भर करेगा। पोंटिंग को लगता है कि ग्लेन मैक्सवेल शायद तब तक टीम में न रहें, क्योंकि उनका करियर अंत की ओर बढ़ता दिख रहा है।
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