नई दिल्ली में चल रहे India AI Impact Summit 2026 में गैलगोटियास यूनिवर्सिटी के स्टॉल को लेकर विवाद और गहरा गया है। पहले रोबोटिक डॉग को लेकर सवाल उठे थे और अब एक “ड्रोन सॉकर एरिना” को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। बताया गया कि समिट में यूनिवर्सिटी ने कुछ तकनीकी उपकरणों को इन-हाउस इनोवेशन के रूप में पेश किया था।
लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट के बाद इन दावों पर सवाल खड़े होने लगे। इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर के इस बड़े AI कार्यक्रम में पारदर्शिता और दावों की सच्चाई को लेकर बहस छेड़ दी है।
Drone soccer arena को बताया गया इन-हाउस इनोवेशन
JUST IN
— China pulse 🇨🇳 (@Eng_china5) February 18, 2026
The University of Galgautia in India claimed to have built this drone model from scratch, completing its engineering entirely. In reality, the Stryker V3 ARF is commercially available. pic.twitter.com/aBHv1eNfQr
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में यूनिवर्सिटी की कम्युनिकेशन प्रोफेसर एक “ड्रोन सॉकर एरिना” के बारे में बात करती दिखाई देती हैं। वह इसे पूरी तरह यूनिवर्सिटी में विकसित तकनीक बताती हैं और दावा करती हैं कि यह भारत का पहला ऐसा सिस्टम है। उनके अनुसार, इस एरिना की इंजीनियरिंग से लेकर उसके उपयोग तक का काम कैंपस में ही किया गया है।
वीडियो में वह कहती हैं कि छात्र इस एरिना के अंदर गेम खेलते हैं, ड्रोन उड़ाते हैं और अपनी तकनीकी क्षमता को बेहतर बनाते हैं। इसी दावे के बाद सोशल मीडिया पर इस प्रोजेक्ट की असलियत को लेकर बहस शुरू हो गई।
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Social Media पर दावों का विरोध
ड्रोन सॉकर एरिना के दावों पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने आपत्ति जताई है। कुछ पोस्ट में कहा गया कि यह ड्रोन दक्षिण कोरिया में उपलब्ध एक कमर्शियल प्रोडक्ट से मिलता-जुलता है। यूजर्स ने Helsel नाम की कंपनी का जिक्र किया, जो 2015 में ड्रोन सॉकर की शुरुआत करने का दावा करती है और 2017 में इसे दक्षिण कोरिया में लॉन्च किया गया था।
यह खेल World Air Sports Federation से मान्यता प्राप्त बताया गया है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी में दिखाया गया ड्रोन बाजार में मिलने वाले Stryker V3 ARF जैसे उत्पाद से मिलता है। इन दावों ने विवाद को और बढ़ा दिया।
Youth congress ने भी उठाए सवाल
AI Summit का सबसे हिट स्टार्टअप,
— Indian Youth Congress (@IYC) February 18, 2026
“Make in China/Korea, Claim in India Pvt. Ltd.”
रोबोट चीन का, ड्रोन कोरिया का,
पर क्रेडिट पूरा “विश्वगुरु” का! pic.twitter.com/wgBOHaHckb
इस मामले में यूथ कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। संगठन ने आरोप लगाया कि ड्रोन को कोरियाई उत्पाद बताया जा रहा है और यूनिवर्सिटी के दावों पर सवाल खड़े किए। पोस्ट में प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी की गई और “आत्मनिर्भर” दावे को लेकर तंज कसा गया।
यूथ कांग्रेस ने कहा कि जिसे भारत का पहला ड्रोन सॉकर सिस्टम बताया गया, वह असल में कोरिया का उत्पाद है। इस राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद विवाद और चर्चा में आ गया। हालांकि यूनिवर्सिटी ने ड्रोन को लेकर अब तक कोई नया स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
पहले भी उठा था रोबोटिक डॉग को लेकर विवाद
इससे पहले यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर “Orion” नाम से दिखाए गए रोबोटिक डॉग को लेकर भी सवाल उठे थे। कुछ लोगों ने इसे चीन की कंपनी Unitree द्वारा बनाए गए Unitree Go2 मॉडल के रूप में पहचाना। यह एक कमर्शियल रोबोट है, जिसकी कीमत भारत में लगभग 2 से 3 लाख रुपये बताई गई है।
आरोप लगाया गया कि इसे समिट में इन-हाउस इनोवेशन की तरह पेश किया गया। इसके बाद मामला तेजी से बढ़ा और समिट में यूनिवर्सिटी के स्टॉल को खाली करने के निर्देश दिए गए। सरकारी सूत्रों ने बाद में पुष्टि की कि पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर यह कदम उठाया गया।
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Professor ने क्या कहा था और यूनिवर्सिटी का जवाब

रोबोटिक डॉग की प्रस्तुति के दौरान प्रोफेसर नेहा सिंह ने DD News से बातचीत में कहा था कि यूनिवर्सिटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 350 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है और कैंपस में डेटा साइंस और AI का अलग ब्लॉक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि “Orion” को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है और यह निगरानी जैसे छोटे कार्य कर सकता है।
बाद में विवाद बढ़ने पर यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा कि उसने यह रोबोडॉग नहीं बनाया और ऐसा दावा भी नहीं किया। संस्थान ने कहा कि वह ऐसे दिमाग तैयार कर रहा है जो भविष्य में इस तरह की तकनीक विकसित करेंगे।
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