Ramadan 2026 के 17 फरवरी की शाम से शुरू होने की संभावना है, जबकि पहला रोज़ा 18 फरवरी को रखा जा सकता है। असली तारीख चाँद दिखने पर तय होगी। रमज़ान इस्लाम का पवित्र महीना है, जिसमें रोज़ा रखकर लोग अल्लाह की इबादत करते हैं, कुरआन पढ़ते हैं और ज़्यादा से ज़्यादा नेक काम व दान करते हैं।
Ramadan 2026: कब से शुरू होगा पवित्र महीना? जानें तारीख
Ramadan यानी रमज़ान का पवित्र महीना लगभग 18 या 19 फरवरी से शुरू होने की उम्मीद है। सही तारीख इस बात पर निर्भर करती है कि चाँद कब दिखाई देता है। अलग-अलग देशों में चाँद देखने के तरीके और इस्लामिक संस्थाओं के ऐलान अलग हो सकते हैं, इसलिए शुरुआत की तारीख थोड़ी बदल सकती है।

रमज़ान इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर का नौवां महीना है और यह 29 या 30 दिन का होता है। क्योंकि हिजरी कैलेंडर चाँद के हिसाब से चलता है, इसलिए रमज़ान हर साल अंग्रेज़ी कैलेंडर से लगभग 10 से 12 दिन पहले आ जाता है।
इस पूरे महीने में मुसलमान लोग सुबह से शाम तक रोज़ा रखते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं। इसे आत्म-संयम, सब्र और अल्लाह की इबादत का खास महीना माना जाता है।
Ramadan के दौरान रोज़ा रखने वाले मुसलमान लोग सुबह सूरज निकलने से पहले से लेकर शाम सूरज ढलने तक कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं। यह समय आमतौर पर जगह के हिसाब से लगभग 12 से 15 घंटे तक होता है।
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History of Ramzan कैसे शुरू हुआ पवित्र महीना और क्यों है इतना खास?
Ramadan की शुरुआत 7वीं सदी से मानी जाती है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, साल 610 ईस्वी में पैगंबर Muhammad (हज़रत मुहम्मद) पर पहली बार कुरआन की आयतें नाज़िल हुई थीं। उस समय वे मक्का के पास स्थित Cave of Hira में इबादत और ध्यान कर रहे थे। माना जाता है कि यही घटना रमज़ान के महीने में हुई थी, इसलिए यह महीना बहुत पवित्र माना जाता है।

इसके बाद मुसलमानों के लिए रमज़ान में रोज़ा रखना फर्ज़ (जरूरी) कर दिया गया। रोज़ा रखना इस्लाम के पांच बुनियादी उसूलों में से एक है। रोज़े का मतलब है सुबह से शाम तक खाना-पीना छोड़कर सब्र और खुद पर नियंत्रण रखना, ताकि इंसान अपने अंदर की बुराइयों को कम करे और अल्लाह के करीब हो सके।
तब से लेकर आज तक, दुनिया भर के मुसलमान हर साल रमज़ान का महीना पूरी आस्था और सम्मान के साथ मनाते हैं। इस दौरान लोग ज्यादा नमाज़ पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं, गरीबों की मदद करते हैं और अच्छे कामों पर ध्यान देते हैं। रमज़ान को आत्म-सुधार, सब्र और नेकी का महीना माना जाता है।
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Ramzan Fasting रमज़ान में क्यों रखा जाता है उपवास और क्या है इसका महत्व?
Ramadan में रोज़ा रखना इस्लाम के पांच मुख्य स्तंभों में से एक है। मुसलमान मानते हैं कि इसी महीने में करीब 1400 साल पहले पैगंबर Muhammad पर कुरआन की पहली आयतें नाज़िल हुई थीं। रमज़ान के दौरान रोज़ेदार सुबह सूरज निकलने से पहले सहूर करते हैं और फिर सूरज डूबने तक कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं।

इस दौरान खाना, पानी, धूम्रपान और अन्य शारीरिक इच्छाओं से भी दूर रहा जाता है। इसका मकसद सिर्फ भूखा रहना नहीं, बल्कि सब्र सीखना, खुद पर काबू पाना और अल्लाह की इबादत करना है। लोग ज्यादा नमाज़ पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं।
भारत में पहले दिन रोज़ा सुबह लगभग 5:37 बजे शुरू होकर शाम करीब 6:15 बजे खत्म हो सकता है, जो महीने के अंत तक बढ़कर करीब 13 घंटे से ज्यादा का हो जाता है। रमज़ान को आत्म-सुधार और नेकी का महीना माना जाता है।
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